कन्हैया लाल सेठिया की कविताएं

संसार
यह है
रामलीला के
सामान की
दुकान
यहाँ राम और रावण के
मुखौटे के
एक ही दाम !
***

सड़क
रात
कोलतार की सड़क
जो सीधी जाती है
सूरज के गांव !
***

सच
रास्ता
पैरों का
शिष्य है

जो
मान लेते हैं
उसे गुरु
उन्हें
नहीं मिलती
मंज़िल !
***

कविता को फांसी 
कविता ने किया विरोध
अन्याय का, भ्रष्टाचार का
अपसंस्कृति का, शोषण का
एटम के परीक्षण का
तब कविता के बैरियों ने
एकत्र हो कर
दे दी अर्जी कचहरी में
हाकीम मे भिजवाया- 
समन कविता को
कचहरी में राजाज्ञा रखने
तारीख पर कविता हुई हाजिर
पेशकार ने सुनाएं आरोप
कहा कविता को
अपना बयान देने के लिए
कविता ने कहा-
सारे आरोप सही हैं
दी जाए सजा
हाकीम ने दिया फैसला-
कविता को फांसी दी जाए ।
***

अनुवाद : नीरज दइया

कवि कन्हैयाल सेठिया (11 सितम्बर, 1919 - 11 नवंबर, 2008) राजस्थानी हिंदी के प्रख्यात जनकवि रहे हैं । भारत सरकार द्वारा 'पद्म-श्री' से सम्मानित। 'लीलटांस' के लिए राजस्थानी में साहित्य अकादेमी, 'सबद' काव्य-संग्रह के लिए राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा सर्वोच्च पुरस्कार के अलावा ज्ञानपीठ के मूर्तिदेवी सहित अनेक मान-सम्मान और पुरस्कारों से पुरस्कृत महाकवि के रूप में विख्यात और राजस्थानी के कालजयी कवि हैं ।

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